छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC भर्ती घोटाले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए एग्जाम कंट्रोलर समेत तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक करता है, वह लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करता है। यह अपराध इतना गंभीर है कि इसे क्रूरतम अपराधों की श्रेणी में रखा जा सकता है। कोर्ट का मानना है कि यह कार्य केवल परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर ही सवाल नहीं उठाता, बल्कि युवा पीढ़ी के सपनों को भी तोड़ देता है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रश्नपत्र लीक कराना एक तरह से समाज और प्रतिष्ठित संस्थाओं को कलंकित करना है। मामले में आरोपी बाहरी दबाव डालकर लाभ उठाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए एग्जाम कंट्रोलर और दो अन्य आरोपी टामन सिंह की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि इस तरह की धांधली को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





