नई दिल्ली के संसद भवन परिसर में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने EVM, चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। लेकिन लोकतंत्र बचाने की इस कोशिश में खुद विपक्ष की हिंदी की हालत सामने आ गई। दरअसल, विरोध प्रदर्शन के दौरान जो बड़ा बैनर सामने रखा गया था, उसमें ‘लोकतंत्र’ को ‘लोकतंतर’ लिखा गया।

ये नज़ारा जितना विरोध का था, उतना ही देश की सबसे पुरानी पार्टी की लापरवाही को भी उजागर कर गया। सोशल मीडिया पर इस टाइपो को लेकर विपक्ष की जमकर खिंचाई हो रही है। एक यूजर ने चुटकी लेते हुए पूछा – “कहीं ये बैनर सोनिया गांधी ने तो नहीं लिखा?” वहीं एक अन्य ने कहा – “Opposition is good for nothing!”




लोगों का कहना है कि जो पार्टी खुद स्पेलिंग चेक नहीं कर सकती, वो देश का लोकतंत्र कैसे बचा पाएगी? यह स्थिति विपक्ष की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है। हिंदी जैसी भाषा में इस तरह की चूक क्या दर्शाती है कि विपक्ष सिर्फ नारे देने में ही व्यस्त है, ज़मीनी तैयारी और गंभीरता कहीं पीछे छूट गई है?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और उसके साथी इस “लोकतंतर” की गलती को कैसे सुधारते हैं – स्पेलिंग से या सोच से?



