भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान दिया है। टिकैत ने कहा कि धनखड़ ने स्वयं पद नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि वे लगातार ग्रामीणों, किसानों और गरीबों की समस्याओं को उठाते रहे।
मुजफ्फरनगर में मीडिया से बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा कि उपराष्ट्रपति के इस्तीफे से पहले कोई स्वास्थ्य संबंधी कारण सामने नहीं आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में काम कर रही है और ऐसे में गांव और किसान की बात करने वाले लोगों के लिए इस शासन में कोई जगह नहीं है।
टिकैत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राजनीतिक दल अब पूरी तरह से पूंजीपतियों के शिकंजे में हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उपराष्ट्रपति पद पर बैठे जगदीप धनखड़ एक पार्टी की भीतरी राजनीति की चपेट में आ गए हैं।
इशारों-इशारों में भाजपा को घेरते हुए टिकैत ने कहा कि जो युवा पार्टी से समझौता करते हैं, उन्हें भविष्य में ‘दुष्यंत चौटाला’ जैसा बना दिया जाएगा और जो वरिष्ठ नेता हैं, उन्हें ‘पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक’ या ‘पूर्व उपराष्ट्रपति’ की स्थिति में पहुंचा दिया जाएगा। टिकैत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगली बार सत्ता का असर किसी और के दरवाजे पर महसूस होगा।



