हर दिन खाई जा रही ‘छिपी हुई चीनी’ बन रही है सेहत की दुश्मन, जानिए कैसे रखें खुद को सुरक्षित

Madhya Bharat Desk
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जब भी मीठे की बात आती है, हमारे दिमाग में मिठाइयां, केक या सॉफ्ट ड्रिंक जैसे चीज़ें आ जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनसे भी ज़्यादा खतरनाक होती है रोजमर्रा की चीज़ों में छुपी हुई चीनी, जिसे हम अनजाने में अपनी थाली और गिलास में शामिल करते रहते हैं।

सेहत की पहली शर्त: समझदारी से खाएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शरीर को बीमारियों से बचाना है तो सबसे पहले खान-पान की आदतों को सुधारना ज़रूरी है। हमारी रोज की डाइट में कई ऐसी चीज़ें होती हैं जिनमें ‘हिडेन शुगर’ यानी छिपी हुई चीनी पाई जाती है। ये न केवल डायबिटीज़ को न्योता देती है, बल्कि मोटापा, हृदय रोग और कैंसर जैसे गंभीर खतरे भी बढ़ा सकती है।

क्या होती है छिपी हुई चीनी?

छिपी हुई चीनी वो होती है जो स्वाद में बहुत मीठी न लगे, लेकिन खाने-पीने की चीजों में बतौर संरक्षक या स्वाद बढ़ाने वाले तत्व के रूप में मौजूद होती है। यह अक्सर प्रोसेस्ड फूड, पैक्ड स्नैक्स, सॉस, ब्रेड, डिब्बाबंद जूस और ड्रिंक्स में छिपी होती है। लेबल पर शुगर फ्री लिखा होता है लेकिन उसमें ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, मॉल्टोज़, हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप जैसे नामों में चीनी मिलाई जाती है।

सेहत पर बुरा असर डाल रही है ‘हिडेन शुगर’

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट बताती है कि अतिरिक्त चीनी का नियमित सेवन टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा दोगुना कर देता है। वहीं जामा (JAMA) में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि ज़्यादा चीनी लेने वाले लोगों में हृदय रोग और असमय मौत की आशंका कहीं अधिक होती है।

छिपी हुई चीनी से शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ता है, जिससे कोलन और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

कोल्ड ड्रिंक और मीठे जूस भी हैं खामोश कातिल

जो लोग कोल्ड ड्रिंक, मीठे जूस या फ्लेवर वाले एनर्जी ड्रिंक का बार-बार सेवन करते हैं, उनके लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग हफ्ते में दो बार मीठे पेय लेते हैं, उनमें दिल की बीमारी का खतरा 15% तक बढ़ जाता है, वहीं अगर वे एक्सरसाइज नहीं करते तो यह खतरा 50% तक बढ़ जाता है।

कैसे बचें ‘हिडेन शुगर’ से?

1. खाने के लेबल ज़रूर पढ़ें – कोई भी पैकेट वाला सामान खरीदते समय उसमें मौजूद सामग्री की लिस्ट ध्यान से पढ़ें।

2. प्राकृतिक विकल्प अपनाएं – शक्कर की जगह शहद, गुड़, खजूर जैसे नेचुरल स्वीटनर का इस्तेमाल करें।

3. प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं – डिब्बाबंद, रेडी टू ईट और इंस्टेंट फूड्स को कम से कम करें।

4. मीठे पेयों को सीमित करें – कोल्ड ड्रिंक और मीठे जूस की जगह नारियल पानी या सादा पानी पिएं।

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