नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई बार लोग इन दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि असल में इनका स्वभाव और प्रभाव अलग होता है। सही इलाज के लिए इनके बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है।

क्या है एंग्जायटी?
एंग्जायटी यानी चिंता या घबराहट, आमतौर पर किसी अनिश्चित भविष्य की घटना को लेकर होती है। इसके लक्षणों में दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी शामिल हैं। यह अक्सर परीक्षा, इंटरव्यू जैसी परिस्थितियों से जुड़ी होती है, लेकिन कभी-कभी बिना कारण भी हो सकती है।

क्या है डिप्रेशन?
डिप्रेशन यानी अवसाद, मुख्य रूप से लगातार उदासी, निराशा और रुचि खत्म होने से जुड़ा है। इसके लक्षणों में नींद की समस्या, भूख में बदलाव, ऊर्जा की कमी और खुद को बेकार समझने की भावना शामिल है। यह व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालता है।

दोनों के बीच का अंतर
- एंग्जायटी “क्या होगा?” की भावना पर केंद्रित होती है।
- डिप्रेशन “अब कुछ नहीं हो सकता” की सोच पर आधारित होता है।
दोनों स्थितियां गंभीर हैं और कई बार एक साथ भी हो सकती हैं। लंबे समय तक चिंता बने रहने से डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

उपचार और समाधान
इन मानसिक स्थितियों का इलाज संभव है।
- थेरेपी (जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी)
- दवाएं
- जीवनशैली में बदलाव
इनसे मरीज की स्थिति बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से संपर्क करना चाहिए।







