सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। रायपुर में सामने आए ताजा मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ठग किस हद तक जाकर लोगों को अपने जाल में फंसा सकते हैं—even well-educated government officers.
घटना का सार:
आर्थिक और सांख्यिकी विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत माया तिवारी सोशल मीडिया पर एक वीडियो विज्ञापन से प्रभावित हुईं। इसमें कहा गया था कि सरकारी समर्थन प्राप्त कंपनी में निवेश करने पर छह महीने में पैसा दोगुना हो जाएगा। विज्ञापन इतना विश्वसनीय लगा कि उन्होंने उस पर भरोसा कर रजिस्ट्रेशन कर दिया।
कुछ महिलाओं ने भी कंपनी की साख का दावा कर माया तिवारी का भरोसा और बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने 20 से अधिक बार में कुल 90 लाख रुपये अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ठगों को भेज दिए। जब समय बीतने पर भी कोई लाभ नहीं मिला, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस में शिकायत:
माया तिवारी ने यह मामला नवा रायपुर के राखी थाने में दर्ज कराया। पुलिस के अनुसार, माया को फेसबुक पर यह विज्ञापन 3 मार्च को दिखाई दिया था। वीडियो और ‘सरकारी समर्थन’ जैसे शब्दों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यह एक वैध योजना है।







