सार
यूरोप के जंगलों में आग ने विकराल रूप ले लिया है। दक्षिणी यूरोप के कई देशों में जंगल की आग ने आम जनजीवन को संकट में डाल दिया है।
विस्तार
ग्रीस, इटली, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल और तुर्किये जैसे देशों में पिछले कुछ दिनों से जंगलों में लगातार आग लगी हुई है। ग्रीस में ही 28,000 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल स्वाहा हो चुके हैं। 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचे तापमान, गर्म हवाएं और लगातार सूखा इस संकट को और अधिक गहरा बना रहे हैं।
यूरोपीय स्पेस एजेंसी की कोपर्निकस सैटेलाइट मॉनिटरिंग के अनुसार, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एयर ट्रैफिक बाधित हुआ है, जिससे कई फ्लाइट्स रद्द और लेट हो रही हैं। सिसिली, कैनरी द्वीप और एथेंस जैसे क्षेत्रों में स्कूल और दफ्तर अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
आग लगने के मुख्य कारण:
विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक गर्मी, लंबे समय से जारी सूखा और तेज हवाएं जंगलों को आग पकड़ने के लिए अत्यंत संवेदनशील बना रहे हैं।
इसके साथ ही कुछ मानवीय कारण जैसे सिगरेट के टुकड़े, अवैध कैम्प फायर और बिजली लाइनों से निकली चिंगारियां भी वजह बनी हैं। कुछ क्षेत्रों में बिजली गिरने से आग फैलने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
राहत व बचाव कार्य तेज़:
ग्रीस, स्पेन और इटली को फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और पोलैंड जैसे देशों से अग्निशमन विमानों और विशेषज्ञ कर्मियों की सहायता मिली है। यूरोपीय संघ ने आपात प्रबंधन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है और सैटेलाइट, ड्रोन तथा एयरक्राफ्ट के ज़रिए पूरे घटनाक्रम पर निगरानी रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ मौसमी आपदा नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके:
- ग्रीस: एथेंस और आसपास के इलाके
- इटली: सिसिली और सार्डिनिया
- स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और तुर्किये में भी भारी नुकसान
- कई स्थानों पर आपातकालीन सेवाएं सक्रिय







