रायपुर। विवादों, बजट और “विकास कार्यों” के लंबे नाट्य के बाद अब रायपुर का ऐतिहासिक बूढ़ातालाब एक बार फिर “पर्यटन मंडल” यानी सीधे-सीधे नेता जी के संरक्षण में सौंप दिया गया है। स्मार्ट सिटी की साज-सज्जा और निगम के 15 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद तालाब की देखरेख उसी के हवाले कर दी गई, जिससे सवाल शुरू हुए थे।
दरअसल, नगर निगम और स्मार्ट सिटी ने मिलकर पिछले कुछ सालों में बूढ़ातालाब को सजाने-संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पर जब असली देखरेख की बात आई, तो “पर्यटन मंडल” नामक पर्दे के पीछे वही पुराने हाथ सक्रिय हो गए — जिनका एजेंडा विकास कम, नियंत्रण ज्यादा होता है।
बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण में करोड़ों खर्च करने के बाद अब जनता की जेब से निकले पैसों का भविष्य फिर उन्हीं लोगों के हवाले है, जिनकी पहचान ‘घोषणाओं और फोटू खिंचवाने’ में है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 2017 में इस जलाशय को पर्यटन मंडल को सौंपा गया था, लेकिन रखरखाव के नाम पर सिर्फ बोर्ड बदले और योजनाएं लटकी रहीं। अब एक बार फिर वही सीन दोहराया जा रहा है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार जनता को दिखावे की नई चाशनी में पुराना स्वाद परोसा जा रहा है।








