इंडस्ट्रियल एरिया में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक कार्बन फैक्ट्री का बॉयलर टैंक अचानक तेज धमाके के साथ फट गया।
हादसा इतना भयावह था कि टैंक से निकलता गर्म केमिकल लावा की तरह बहने लगा। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बीच चीख-पुकार मच गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। राहत की बात यह रही कि इस बार कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और सभी कर्मचारी सुरक्षित बच निकले।
लेकिन इस घटना ने फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी है। जानकारी के मुताबिक, यह फैक्ट्री बिना किसी पहचान बोर्ड और जरूरी नियम-कायदों के संचालित की जा रही थी। अंदर टैंकरों के जरिए लाया गया लिक्विड स्टोर किया जाता है, जिससे कार्बन तैयार किया जाता है।
घटना के बाद फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद दो टैंकर पानी और फोम का इस्तेमाल कर हालात को काबू में किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के यह फैक्ट्री कैसे चल रही थी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
सक्ती के वेदांता प्लांट हादसे के बाद भी अगर ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, तो यह साफ संकेत है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी लगातार जारी है।



