छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से सभी जिलों में विद्यालयों को मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन द्वारा जारी पत्र क्रमांक 1262/887/2025/20-दो, नया रायपुर, दिनांक 7 अक्टूबर 2025 के तहत इस योजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में लिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष लगभग 1500 शालाओं को शैक्षणिक एवं भौतिक दृष्टि से मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। शासन का प्रमुख उद्देश्य इन विद्यालयों को शैक्षणिक गुणवत्ता की दृष्टि से सक्षम बनाना तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
विभागीय पत्र में उल्लेख किया गया है कि मॉडल विद्यालय की कार्ययोजना बनाते समय कुछ प्रमुख बिंदुओं का पालन अनिवार्य होगा, जिनमें—
1. विद्यालय का कक्षा-वार बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करना,
2. विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर विशेष ध्यान देना,
3. शिक्षकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और विद्यार्थियों से मधुर संबंध बनाए रखना,
4. विद्यार्थियों में अनुशासन एवं स्वच्छता की आदतों को प्रोत्साहित करना,
5. अभिभावकों की विद्यालय से जुड़ाव और सहभागिता बढ़ाना,
6. विद्यालय में आवश्यक भौतिक संरचना जैसे स्वच्छ शौचालय, पुस्तकालय, खेल सामग्री, प्रयोगशाला आदि की व्यवस्था करना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, जिले की परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर अन्य बिंदु भी कार्ययोजना में जोड़े जा सकते हैं।
शासन ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिलों में पीएम श्री विद्यालय, इंग्लाइट विद्यालय, सेजेस विद्यालय और मुख्यमंत्री डीईवी विद्यालयों को उपरोक्त मानकों के अनुरूप मॉडल विद्यालयों के रूप में विकसित करें। इसके लिए 2025-26, 2026-27 और 2027-28 सत्रों की कार्ययोजना तैयार करनी होगी, जिसमें विद्यालयवार प्राथमिकताएं, आवश्यक संसाधन और शैक्षणिक सुधार के कदम शामिल होंगे।
राज्य सरकार का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से राज्य के शैक्षणिक परिदृश्य में सुधार लाना, विद्यालयों में अनुशासन, स्वच्छता और नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, जिससे विद्यार्थियों को न केवल बेहतर शिक्षण वातावरण मिलेगा, बल्कि वे समग्र विकास की दिशा में अग्रसर हो सकेंगे।



