वेदांता प्लांट हादसे में एक और सवाल: क्या कारखाना अवैध है?— अनिल दुबे

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। सक्ति-चांपा में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हाल ही में हुए भीषण हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुर्घटना में 24 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि सैकड़ों श्रमिक घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। यह जांच कमिश्नर स्तर पर की जा रही है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि हादसे के पीछे की असल वजह सामने आएगी।

इसी बीच राज्य आंदोलनकारी और  सामाजिक कार्यकर्ता अनिल दुबे ने बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रदेश में चल रही अवैध औद्योगिक गतिविधियों की पोल खोलता मामला है। उनका आरोप है कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में बिना वैध अनुमति के कारखाने संचालित हो रहे हैं, जिन्हें आर्थिक लाभ लेकर संरक्षण दिया जा रहा है।

अनिल दुबे ने महासमुंद जिले के तुमगांव क्षेत्र के ग्राम खैरझिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां करणी कृपा प्राइवेट लिमिटेड और नूतन इस्पात जैसे उद्योग अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में इस तरह के कारखाने खुलेआम चल रहे हैं, तो क्या वेदांता पावर प्लांट भी पूरी तरह नियमों के तहत संचालित हो रहा था या नहीं यह भी जांच का विषय होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हादसे के बाद भी कई फैक्ट्रियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।

अनिल दुबे के साथ लालाराम वर्मा, छन्नू साहू, नंद कुमार साहू और गणपति पटेल ने संयुक्त रूप से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच 15 दिनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए। उनका कहना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।

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