प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस कमेटी में आपसी खींचतान!

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

कांग्रेस के ‘संगठन सृजन’ अभियान को लेकर अब पार्टी के भीतर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। दो महीने पहले दिल्ली में पार्टी नेतृत्व ने जिला अध्यक्षों को कार्यकारिणी गठन का पूर्ण अधिकार देने की बात कही थी, लेकिन ताज़ा घटनाक्रम ने इस दावे पर संशय पैदा कर दिया है।

दरअसल, जिला कार्यकारिणी की सूची जारी होते ही प्रदेश नेतृत्व द्वारा उसे रद्द कर दिया गया, जिसके बाद कई जिला अध्यक्षों में असंतोष बढ़ गया है। जिला स्तर पर कहा जा रहा है कि यदि नियुक्तियों का अंतिम निर्णय प्रदेश स्तर से ही होना है, तो ‘संगठन सृजन’ की प्रक्रिया का उद्देश्य क्या रह जाता है?

सूची रद्द होने के बाद बढ़ा असंतोष

सूची निरस्त होने के बाद जिला स्तर पर भ्रम और असंतोष का माहौल है। जिला अध्यक्षों का कहना है कि उन्हें अधिकार तो दिए गए, लेकिन उन पर अमल करने की स्वतंत्रता नहीं मिली। वहीं, एक जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्री कुमार मेनन ने फोन पर बातचीत कर बताया कि सूची पेंडिंग में रखा गया है उसमें संशोधन ज़रूरी था और कुछ नामों में बदलाव के बाद नई सूची जारी की जाएगी।

ब्लॉक और जिला नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी

इस विवाद की एक बड़ी वजह नियुक्तियों का क्रम भी बताया जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति से पहले ही ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी थी। अब स्थिति यह है कि कई ब्लॉक अध्यक्ष स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं और जिला अध्यक्षों के निर्देशों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं, जिससे संगठनात्मक समन्वय पर असर पड़ रहा है।

‘संगठन सृजन’ की विश्वसनीयता पर सवाल

कुल मिलाकर, इस घटनाक्रम ने ‘संगठन सृजन’ की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जिला स्तर के नेतृत्व को अधिकार दिए गए हैं, तो निर्णय प्रक्रिया में लगातार हस्तक्षेप क्यों? पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान आने वाले समय में संगठनात्मक एकजुटता की परीक्षा ले सकती है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment