महासमुंद। विश्व धरोहर सिरपुर को बचाने और जिले में संचालित कथित अवैध उद्योगों के खिलाफ किसानों का आक्रोश अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में सत्याग्रही किसान 16 दिसंबर को गांव-गांव से निकलकर लोहिया चौक महासमुंद पहुंचेंगे और वहां से बर्बाद धान लेकर पदयात्रा करते हुए जिलाधीश कार्यालय तक मार्च करेंगे।
किसान नेताओं का आरोप है कि करणी कृपा पावर प्राइवेट लिमिटेड और नूतन इस्पात एवं पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है, बावजूद इसके जिला प्रशासन माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं कर रहा। किसानों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी से अवैध कंपनियां खुद को मालिक समझने लगी हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल उद्योग विरोधी नहीं, बल्कि किसानों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़ा सवाल है। आंदोलनरत किसानों का कहना है कि वे राज्य सरकार के ‘सुशासन’ के दावों की जमीनी हकीकत प्रशासन को दिखाएंगे।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को लेकर भी बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य आंदोलनकारी किसान मोर्चा के अध्यक्ष अनिल दुबे ने प्रतिमा को न्यायालय से विधिवत प्राप्त करने हेतु सीजीएम न्यायालय में सुपुर्दनामा आवेदन प्रस्तुत किया है। किसानों ने ऐलान किया है कि वे न्यायालय के रास्ते से ही प्रतिमा को प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम के अनुसार 16 दिसंबर को दोपहर 12 बजे लोहिया चौक से पदयात्रा शुरू होगी, जिसमें बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे।



