छत्तीसगढ़ में दुर्लभ ‘मर्मेड सिंड्रोम’ का मामला: 3 घंटे में ही शिशु ने तोड़ा जीवन

Madhya Bharat Desk
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इस संसार में आते ही हमें चमत्कार की अनुभूति कराता है। पर कभी-कभी प्रकृति की अनियमितताओं और अपरिचित जैविक कारणों से नए जीवन को घटकों की कमी या विकृति के साथ जन्म लेना पड़ जाता है। ऐसी ही एक दुर्लभ और हृदय विदारक घटना छत्तीसगढ़ में सामने आई, जहां एक नवजात शिशु ‘मर्मेड बेबी’ (Mermaid baby) की स्थिति में जन्मा और मात्र 3 घंटे के भीतर उसकी मृत्यु हो गई।

घटना का विवरण

रिपोर्टों के अनुसार, इस शिशु के दोनों पैर आपस में जुड़े हुए थे — मानो जलपरी (mermaid) की स्थिति। डॉक्टरों ने इस स्थिति को सरनोमेलिया (Sirenomelia) या “मर्मेड सिंड्रोम” कहा — एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकृति जिसमें पैरों की संरचना ठीक से विकसित नहीं होती और वे एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।

डॉक्टरों का कहना था कि ऐसी स्थिति विश्व स्तर पर बहुत ही कम दर्ज की गई है — लगभग 300–400 मामलों तक। नवजात को बायोमेडिकल देखभाल दी गई, लेकिन आवश्यक अंग प्रणाली की जटिलताओं और आंतरिक विकारों के कारण वह बहुत शीघ्र ही जीवन खो बैठा।

कारण और चिकित्सा विषयक समझ

सरनोमेलिया की स्थिति भ्रूण विकास के दौरान खून की आपूर्ति की कमी, अभिव्यक्त दोषों (vascular steal phenomenon), भ्रूण की ऊतकों में असामान्य विभाजन, और अन्य अनुबंधित संसाधन विभाजन की विफलताओं से हो सकती है।

इस रोग में अक्सर गुर्दे, मूत्रमार्ग, पाचन तंत्र और मांसपेशियों की संरचनाओं में भी विकृति पाई जाती है। इसलिए, यदि पैरों द्वारा जीवन समर्थन संभव हो भी तो अन्य आंतरिक जटिलताएं अधिकांश मामलों में मृत्यु का कारण बन जाती हैं।

चूंकि यह स्थिति गर्भावस्था के दौरान बहुत जटिल होती है, प्रेग्नेंसी के दौरान अल्ट्रासाउंड जांच कभी-कभी संकेत दे सकती है, लेकिन हर बार यह स्पष्ट नहीं हो पाती।

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