20 साल कैद के बाद आज़ादी! क्या जंगल में जी पाएगा बूढ़ा और अंधा ‘छोटू’ वन भैंसा?

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व से एक दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है। करीब 20 साल तक बाड़े में कैद रहने के बाद अब ‘छोटू’ नाम के बूढ़े और अंधे वन भैंसे को आखिरकार जंगल में आज़ादी देने की तैयारी की जा रही है।

वन विभाग ने एक अहम योजना तैयार की है, जिसके तहत छोटू को असम से लाई गई तीन मादा वन भैंसों के साथ जंगल में छोड़ा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए सभी जानवरों को रेडियो कॉलर पहनाए जाएंगे, ताकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

बताया जा रहा है कि 12 जनवरी 2026 को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस प्रस्ताव को मुख्यालय भेजा गया है। असम से लाई गई मादा वन भैंसों को फिलहाल बारनवापारा अभयारण्य में रखा गया है। जल्द ही इन्हें उदंती अभ्यारण्य लाया जाएगा, जहां करीब 45 दिनों तक इन्हें बाड़े में छोटू के साथ रखा जाएगा।

इसके बाद ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया के तहत इन सभी को जंगल में छोड़ा जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटू के जरिए मादा भैंसों का प्रजनन कराकर वन भैंसों की घटती संख्या को बढ़ाना है।

हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 साल कैद में रहने के बाद, वह भी बूढ़ा और अंधा होने के बावजूद—क्या छोटू जंगल के प्राकृतिक माहौल में खुद को ढाल पाएगा? यह फैसला जितना उम्मीद भरा है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी।

वन विभाग की इस पहल पर अब सबकी नजरें टिकी हैं—क्या यह प्रयोग सफल होगा या छोटू के लिए जंगल की यह नई दुनिया कठिन साबित होगी?

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment