राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे में प्रोटोकॉल पर विवाद, केंद्र ने ममता सरकार से मांगा जवाब

Madhya Bharat Desk
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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान प्रोटोकॉल नियमों के कथित उल्लंघन का मामला अब सियासी तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा, कार्यक्रम स्थल और स्वागत से जुड़े प्रोटोकॉल नियमों के पालन में कई स्तरों पर लापरवाही की शिकायत सामने आई है। इस मामले में केंद्र ने मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के माध्यम से राज्य सरकार को जवाब देने के लिए समयसीमा तय की है।

गृह मंत्रालय ने भेजा पत्र

मामले को लेकर केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। पत्र में वीवीआईपी सुरक्षा से जुड़े “ब्लू बुक” नियमों के कथित उल्लंघन का उल्लेख किया गया है।

“ब्लू बुक” एक महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज होता है, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पदों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल से जुड़े दिशा-निर्देश तय किए जाते हैं।

राष्ट्रपति ने भी जताई नाराजगी

राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास आयोजित एक आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में लोगों की कम मौजूदगी पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कार्यक्रम स्थल को सिलीगुड़ी के बिधाननगर से बदलकर अचानक दूसरे स्थान पर क्यों किया गया।

बताया जाता है कि कार्यक्रम के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।

स्वागत में वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति के राज्य में आगमन पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों का स्वागत के लिए मौजूद रहना प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है। लेकिन इस दौरे में इन अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीर चूक माना जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के स्वागत के लिए केवल सिलीगुड़ी के महापौर की मौजूदगी दर्ज की गई, जिसे भी नियमों के अनुरूप नहीं माना जा रहा।

बुनियादी व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल

दौरे के दौरान कुछ बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। राष्ट्रपति के लिए तैयार किए गए वॉशरूम में पानी की व्यवस्था नहीं होने और उनके गुजरने वाले रास्ते पर कचरा पाए जाने की शिकायत भी सामने आई है।

केंद्र ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि इस मामले में दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट, सिलीगुड़ी के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट जैसे अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

कार्यक्रम स्थल बदलने से कम हुई भीड़

दरअसल, राष्ट्रपति को आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम में शामिल होना था, जिसका आयोजन पहले सिलीगुड़ी के बिधाननगर में तय किया गया था। बाद में सुरक्षा और अन्य कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में शिफ्ट कर दिया गया।

स्थल बदलने के कारण कार्यक्रम में अपेक्षा से काफी कम लोग पहुंच सके। इस पर राष्ट्रपति ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि कार्यक्रम मूल स्थान पर होता तो ज्यादा लोगों की भागीदारी संभव थी।

फिलहाल, केंद्र सरकार राज्य सरकार के जवाब का इंतजार कर रही है। जवाब मिलने के बाद ही इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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