पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इस्राइल पर नागरिकों को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि आमिर सईद इरवानी ने दावा किया कि हालिया हमलों में आम नागरिकों और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र में दिए गए अपने बयान में इरावानी ने कहा कि अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाइयों के कारण ईरान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि घनी आबादी वाले इलाकों में भारी बम गिराए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों की जान खतरे में पड़ गई है।
रिहायशी इलाकों पर हमले का आरोप
ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि कई शहरों में बिना किसी भेदभाव के हमले किए जा रहे हैं। उनके अनुसार रिहायशी क्षेत्रों, सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक ढांचे को निशाना बनाया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि हमलों में करीब 2000 पाउंड तक के भारी बम इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा रहे हैं। ईरान का कहना है कि इन हमलों से नागरिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो रहा है।
1300 से ज्यादा लोगों की मौत का दावा
ईरान के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक 1,332 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है।
ईरानी प्रतिनिधि के अनुसार इस हिंसा में 180 से अधिक बच्चों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य अभी जारी है।
स्कूल और अस्पताल भी प्रभावित
ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण संस्थानों को भी हमलों में नुकसान पहुंचा है। इनमें हवाई अड्डे, स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, आवासीय इमारतें, खेल परिसर, मस्जिदें और पुलिस मुख्यालय शामिल हैं।
ईरान के अनुसार अब तक 20 से अधिक स्कूल और 13 स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे आम नागरिकों के लिए हालात और भी मुश्किल हो गए हैं।
सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग
ईरान ने इस मामले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
इरावानी ने कहा कि ईरान कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस संघर्ष को रोकने की अपील कर चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को आगे आकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और हिंसा को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।







