विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दिया इस्तीफा

Madhya Bharat Desk
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और चुनावी माहौल के बीच इसे अहम राजनीतिक घटना के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बोस ने शाम करीब 4 बजकर 55 मिनट पर अपना इस्तीफा सौंपा। फिलहाल वह दिल्ली में मौजूद बताए जा रहे हैं। हालांकि उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है।

बोस ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में 17 नवंबर 2022 को पदभार संभाला था। उनके अचानक पद छोड़ने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे समय में राज्यपाल का इस्तीफा देना राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल इस मामले में न तो राजभवन की ओर से और न ही केंद्र सरकार की ओर से कोई विस्तृत बयान जारी किया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।

कौन हैं सीवी आनंद बोस

सीवी आनंद बोस भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी रहे हैं और लंबे समय तक प्रशासनिक क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने करियर में कई अहम सरकारी पदों पर काम किया है। इसके अलावा वह मेघालय सरकार के सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

वह एक लेखक, वक्ता और आवास नीति के विशेषज्ञ के रूप में भी पहचाने जाते हैं। बोस ने विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर भारत सरकार में सचिव और मुख्य सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी निभाई भूमिका

अपने प्रशासनिक करियर के दौरान बोस ने जिला कलेक्टर, प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पदों पर काम किया। उन्होंने शिक्षा, वन एवं पर्यावरण, श्रम और सामान्य प्रशासन जैसे कई विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने European Organization for Nuclear Research (CERN) और फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन ऊर्जा संस्था जैसे मंचों पर भारत की ओर से भागीदारी की थी।

कई पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

अपने कार्यकाल के दौरान बोस को कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिले हैं। भारत सरकार ने उन्हें नेशनल हाउसिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया था। उनके विकास से जुड़े कई प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र ने चार बार ‘ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में चुना था।

इसके अलावा उन्होंने पद्मनाभास्वामी मंदिर के खजाने की जांच से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की समिति का भी नेतृत्व किया था।

लेखक और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय

प्रशासनिक सेवा के अलावा बोस साहित्य और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम भाषाओं में करीब 32 किताबें लिखी हैं। इन पुस्तकों में प्रशासन, समाज और विकास जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है।

साथ ही सस्ती आवास योजना, सुशासन, विज्ञान-तकनीक, कृषि, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कई संस्थानों की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

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