राहुल गांधी अक्सर पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी नेताओं को ताकत देने की बात करते रहे हैं। करीब एक साल पहले उन्होंने ‘संगठन सृजन’ की अवधारणा रखते हुए कहा था कि पार्टी में जिला अध्यक्षों को अधिक अधिकार दिए जाएंगे और उनकी सिफारिशों को अहमियत मिलेगी।
लेकिन हिमाचल प्रदेश में पार्टी का हालिया फैसला इस बहस को नया मोड़ दे रहा है। प्रदेश कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अनुराग शर्मा को राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया गया है, जबकि उन्हें जिला अध्यक्ष बने अभी मुश्किल से एक महीना ही हुआ है।
ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यही वह ‘संगठन सृजन’ है, जिसकी बात राहुल गांधी करते रहे हैं। जहां एक ओर पार्टी नेतृत्व जमीनी स्तर के नेताओं को आगे लाने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर इतने कम समय में जिला अध्यक्ष से सीधे राज्यसभा उम्मीदवार बनने का फैसला कई लोगों को चौंका रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस की अंदरूनी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पार्टी में संगठनात्मक पद अब सिर्फ जिम्मेदारी तक सीमित हैं या बड़े राजनीतिक अवसरों की सीढ़ी भी बनते जा रहे हैं।
फिलहाल, अनुराग शर्मा का नाम राज्यसभा के लिए आगे बढ़ने के साथ ही हिमाचल की राजनीति में कांग्रेस का यह फैसला चर्चा और सवाल—दोनों का विषय बन गया है।







