महासमुंद जिले में एक बार फिर छत्तीसगढ़ी अस्मिता को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथ यात्रा, जो होली पर्व के चलते कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दी गई थी, अब 6 मार्च से दोबारा प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में जनसमर्थन जुटाने और सदस्यता अभियान के साथ भ्रमण शुरू करेगी।
इस बीच महासमुंद में अवैध रूप से संचालित एक निजी कंपनी को लेकर विवाद गहरा गया है। किसान मोर्चा और स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि ‘करणी कृपा प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी तुमगांव क्षेत्र में नियमों की अनदेखी कर गतिविधियां चला रही है। साथ ही, छत्तीसगढ़ी महतारी की प्रतिमा को लेकर भी कथित तौर पर आपत्तिजनक कृत्य किए जाने की बात सामने आई है, जिससे लोगों में आक्रोश है।
किसान नेता बृज बिहारी साहू और श्यामू राम सेन ने इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन को लिखित ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि यदि कंपनी के पास वैध अनुमति है, तो जिला प्रशासन सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी दे।
किसान मोर्चा ने सीधे तौर पर विनय लहंगे (जिलाधीश, महासमुंद) से इस विषय में स्पष्ट और लिखित जवाब की मांग की है। वहीं, पुलिस प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अजय त्रिपाठी (एस.डी.ओ.पी., महासमुंद) की टीम सक्रिय है।
रथ यात्रा के आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सम्मान से जुड़ा जनआंदोलन है। 6 मार्च से यात्रा फिर से गांव-गांव जाकर जनमत संग्रह और सदस्यता अभियान के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करेगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या किसान मोर्चा की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल महासमुंद का माहौल राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी गरमाया हुआ है।







