‘शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ 2026’: सरकारी छवि का सहारा लेकर स्पॉन्सरशिप?

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

रायपुर। राजधानी रायपुर में 17 फरवरी को प्रस्तावित ‘शिक्षा संवाद छत्तीसगढ़ 2026’ कार्यक्रम अब विवादों के घेरे में आ गया है। इस आयोजन को लेकर सरकारी छवि के इस्तेमाल और निजी विश्वविद्यालयों से कथित वसूली के आरोप सामने आए हैं।

नोएडा की इवेंट कंपनी इलेट्स टेक्नोमीडिया पर आरोप है कि उसने इस कार्यक्रम को सरकारी आयोजन की तरह प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है कि कंपनी ने उच्च शिक्षा विभाग के एक आधिकारिक पत्र का सहारा लेकर निजी विश्वविद्यालयों से स्पॉन्सरशिप के नाम पर रकम जुटाई।

 सरकारी पत्र के उपयोग पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारती दासन के नाम से जारी एक पत्र में कार्यक्रम को निशुल्क बताते हुए सरकारी लोगो और लेटरहेड के उपयोग की अनुमति दी गई थी। आरोप है कि इसी पत्र को आधार बनाकर प्रदेश की कई निजी यूनिवर्सिटियों से आर्थिक सहयोग लिया गया।

हालांकि, आयोजन पूरी तरह निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा था, लेकिन प्रचार-प्रसार इस तरह हुआ कि इसे सरकारी कार्यक्रम समझा जाने लगा।

 वेबसाइट पर प्रमोशन से बढ़ा भ्रम

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस कार्यक्रम का प्रचार उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी किया गया। वहीं कंपनी की वेबसाइट पर इसे विभाग के सहयोग से आयोजित बताया गया और विभाग को सह-आयोजक के रूप में प्रस्तुत किया गया।

इससे विश्वविद्यालयों और आम लोगों में यह धारणा बनी कि कार्यक्रम पूरी तरह शासन से जुड़ा है।

 कुलपति ने क्या कहा?

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति महादेव कावरे ने बताया कि आयोजन से जुड़े लोग उनके पास भी पहुंचे थे। उन्होंने उच्च शिक्षा सचिव का पत्र दिखाकर कार्यक्रम को सरकारी बताया था। इसी कारण किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ।

 विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने मामले को गंभीर बताते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि जिस इवेंट कंपनी के कार्यक्रम को मध्यप्रदेश में शिकायतों के बाद रद्द किया गया, उसी कंपनी को छत्तीसगढ़ में अनुमति कैसे मिल गई?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी लोगो और मंत्री की तस्वीर के साथ प्रचार क्यों किया गया? यदि निजी विश्वविद्यालयों से राशि ली गई है, तो उसे वापस कराया जाए और जिम्मेदारों पर कानूनी कार्रवाई हो।

 किसने दी अनुमति?

विपक्ष का आरोप है कि यदि कार्यक्रम निजी था, तो सरकारी प्रतीक चिह्न और आधिकारिक पत्र का उपयोग कैसे हुआ? क्या उच्च शिक्षा विभाग ने फंड कलेक्शन की अनुमति दी थी?

 मंत्री का जवाब

उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment