बिलासपुर जिले में निजी स्कूलों का फर्जीवाड़ा

Madhya Bharat Desk
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बिलासपुर, 23 अप्रैल 2026 (विशेष प्रतिनिधि): छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और बिना मान्यता संचालन को लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। व्यापार विहार स्थित ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल पर सख्ती दिखाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने राज्य सरकार को मान्यता रद्द करने की अनुशंसा भेज दी है।

लेकिन इसी क्रम में अमीरी चौक के नारायण ई-टेक्नो स्कूल पर संरक्षण के गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिससे पूरा मामला संदेहास्पद हो गया है। छात्र संगठनों ने अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए राज्य स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल का मामला तब सुर्खियों में आया जब अभिभावकों ने शिकायत की कि स्कूल बिना वैध मान्यता के चल रहा था। शिक्षा विभाग की जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें अवैध फीस वसूली और खराब基础设施 शामिल हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी विजय पांडे ने बताया, “उच्च स्तर के निर्देश पर जांच हुई और राज्य को अनुशंसा भेज दी गई।” लेकिन नारायण ई-टेक्नो स्कूल 2025-26 सत्र में बिना मान्यता के संचालित होने के बावजूद क्लीन चिट पा गया। अभिभावक रमेश साहू ने कहा, “स्कूल ने सीबीएसई का नाम जोड़कर गुमराह किया।

सीजीबीएसई पैटर्न की महंगी किताबें थोपीं और फीस बढ़ा दी। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
जेईओ पांडे की टीम ने स्थानीय स्तर पर जांच कर किसी गड़बड़ी से इनकार किया, लेकिन यह फैसला विवादों में घिर गया। छात्र संगठन एबीवीपी के जिला संयोजक अजय वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ब्रिलिएंट की जांच ऊपर से हुई, नारायण की नीचे से। यह साफ मिलीभगत है।

हम राज्यपाल से जांच की मांग करेंगे। यदि 48 घंटे में कार्रवाई न हुई तो सड़कों पर उतरेंगे।” एनएसयूआई के नेता ने भी समर्थन जताया।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. श्यामा चंद्राकर ने चिंता जताई, “निजी स्कूलों का बूम हो रहा है, लेकिन नियमन कमजोर है। ऐसे फर्जी संचालन से बच्चों का भविष्य दांव पर है।

सरकार को सख्त नीति बनानी चाहिए।” जिले में 200 से अधिक निजी स्कूल हैं, जिनमें से कई पर इसी तरह के आरोप हैं। अभिभावक संगठनों ने भी हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है।

यह मामला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर करारा प्रहार है। क्या प्रशासन दोषियों पर शिकंजा कसेगा या मामला ठंडा पड़ जाएगा? बिलासपुर की जनता जवाब चाहती है।

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