20 साल बाद BNP की वापसी, तारिक रहमान बनेंगे प्रधानमंत्री

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। संसदीय चुनावों में बांग्लादेश राष्ट्रीय दल (BNP) ने पूर्ण बहुमत हासिल कर करीब दो दशकों बाद सत्ता में वापसी की है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पार्टी ने साफ कर दिया है कि उसके शीर्ष नेता तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री होंगे।

 20 साल बाद सत्ता में वापसी

चुनाव परिणामों के अनुसार BNP ने 151 सीटों पर जीत दर्ज कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। ढाका की प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह जीत पार्टी के लिए राजनीतिक पुनरुत्थान से कम नहीं मानी जा रही है। जनता ने इस बार विकास और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दी।

 तारिक रहमान की दमदार जीत

BNP प्रमुख ख़लेजा जिया के पुत्र तारिक रहमान ने बोगरा सीट से शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 2,16,284 वोट मिले। इसके अलावा उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 जैसी अहम सीटों पर भी बढ़त हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने यहां तक कहा था कि वह देश की एकता और विकास के लिए सभी दलों के समर्थकों का स्वागत करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार अवामी लीग के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगी है।

 जमात-ए-इस्लामी को झटका

कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी Jamaat-e-Islami Bangladesh इस चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। शुरुआती रुझानों में उसे 43 सीटों पर बढ़त मिली, लेकिन वह सरकार बनाने की दौड़ से काफी दूर रही। जनता ने उग्र राजनीतिक एजेंडे को नकारते हुए मुख्यधारा की राजनीति पर भरोसा जताया है।

 पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर भरोसा दर्शाती है। साथ ही उन्होंने भारत-बांग्लादेश संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई।

 संवैधानिक सुधारों पर जनमत संग्रह

संसदीय चुनावों के साथ देश में संवैधानिक सुधारों को लेकर जनमत संग्रह भी कराया गया। दो-तिहाई से अधिक मतदाताओं ने सुधारों के समर्थन में मतदान किया। अंतरिम प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनादेश सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में बड़े बदलाव का संकेत है।

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