भोपाल। मध्यप्रदेश की आर्थिक सेहत को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक कमलनाथ ने राज्य सरकार की वित्तीय नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जहां राज्य का अनुमानित वार्षिक बजट करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये है, वहीं कुल कर्ज का आंकड़ा 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। कमलनाथ का कहना है कि यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि आर्थिक प्रबंधन की दिशा पर सवाल उठाने वाला संकेत है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य द्वारा लिए जाने वाले कर्ज की रफ्तार तेज हुई है। वर्ष 2020-21 में जहां करीब 31 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था, वहीं अब यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का अनुमान है। उनका सवाल है कि यदि इतना भारी उधार लिया जा रहा है, तो उसका स्पष्ट और प्रत्यक्ष लाभ आम नागरिकों को क्यों नहीं दिख रहा?
ब्याज भुगतान में खर्च हो रहा बड़ा हिस्सा
कमलनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के खर्च का बड़ा हिस्सा अब पुराने कर्ज की अदायगी और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि बजट का बड़ा भाग ऋण भुगतान में ही चला जाएगा, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए संसाधन कैसे उपलब्ध होंगे?
उनके अनुसार, “नया कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुकाने की स्थिति बनना आर्थिक चेतावनी है। यह आने वाली पीढ़ियों पर वित्तीय बोझ डालने जैसा है।”
विकास मॉडल पर सवाल
सरकार का पक्ष यह हो सकता है कि उधार लेकर विकास कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन कमलनाथ का तर्क है कि यदि विकास इतना व्यापक होता, तो बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसी चुनौतियां अब भी क्यों बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है।
वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता को बताया जाए:
- कर्ज का उपयोग किन परियोजनाओं में हो रहा है?
- ब्याज भुगतान का दबाव कितने समय तक रहेगा?
- राजस्व बढ़ाने के लिए क्या ठोस रणनीति है?
- वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश करोड़ों लोगों की उम्मीदों का प्रदेश है, कोई निजी संस्था नहीं जिसे घाटे में चलाकर भविष्य पर दांव लगाया जा सके।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही अनिवार्य है और जनता को यह जानने का अधिकार है कि प्रदेश की आर्थिक दिशा क्या है और कर्ज की बढ़ती रफ्तार को कैसे नियंत्रित किया जाएगा।



