“नक्सल खत्म होने का दावा, लेकिन विधायक का दौरा रद्द — सच क्या है?”

Madhya Bharat Desk
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“मार्च में नक्सली जड़ से खत्म हो जाएंगे,” यह दावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का है।

“विधायक संवेदनशील इलाकों में फिलहाल दौरा नहीं कर सकते,” यह फैसला भाजपा सरकार के प्रशासन का है।

तो आखिर सच क्या है?

अगर नक्सल गतिविधियां अब भी जारी हैं, तो फिर खत्म क्या हो रहा है?

बीजापुर से सामने आई एक प्रशासनिक चिट्ठी ने इन सवालों को और तेज कर दिया है। 12 फरवरी 2026 को विधायक विक्रम मंडावी का भैरमगढ़ से भोपालपटनम और फरसेगढ़ क्षेत्र के अंदरूनी गांवों—पिल्लूर, एड़ापल्ली, सण्ड्रा, छोटेकाकलेर और गुण्डम—का दौरा प्रस्तावित था। उद्देश्य था ग्रामीणों से मुलाकात और जमीनी हालात का जायजा लेना।

लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा इनपुट का हवाला देते हुए दौरे को स्थगित करने का अनुरोध किया। पत्र में साफ कहा गया कि इन गांवों तक जाने वाले रास्ते कच्चे हैं और क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की सूचना है।

यही वह बिंदु है जहां से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि जब सरकार खुद नक्सल गतिविधियों की आशंका स्वीकार कर रही है, तो फिर “मार्च तक समूल नाश” का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? कुछ नेताओं ने यह तक कह दिया कि “हमारी सरकार के समय विधायक बेरोकटोक दौरा कर पा रहे थे।”

वहीं, सत्तापक्ष का तर्क है कि सुरक्षा एजेंसियों की सलाह को प्राथमिकता देना जिम्मेदार प्रशासन का संकेत है और नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है।

बीजापुर की यह घटना एक बार फिर उस पुराने सवाल को सामने ले आई है—दावे और धरातल के बीच की दूरी कितनी है?

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