रायपुर। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा स्थित आबकारी कार्यालय में लगी आग अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई सवालों और आशंकाओं को जन्म दे रही है। चौथे माले के ऑडिट रूम में लगी इस आग में शराब कारोबार और कथित घोटालों से जुड़ी तमाम अहम फाइलें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं, जिसके बाद पूरे प्रदेश में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह आग आकस्मिक नहीं बल्कि सुनियोजित हो सकती है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चर्चा में रहे तथाकथित शराब घोटाले से जुड़ी फाइलों पर परदा डालने के लिए यह कदम उठाया गया, ताकि जांच की आंच से भ्रष्ट अधिकारी और रसूखदार नेता बच सकें। इस बात की भी चर्चा है कि वर्तमान सरकार अपने भ्रष्टाचार पर परते चढ़ाने के लिए जानबूझकर आग लगवाई है।
“हादसा नहीं, सबूत मिटाने की कोशिश” — आमजन
घटना के बाद आम नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जिस कमरे में आग लगी, वहीं ऑडिट और केस से संबंधित दस्तावेज रखे गए थे। ऐसे में आग का उसी स्थान तक सीमित रहना कई संदेह पैदा करता है।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है—
जब राज्य में शराब नीति और उससे जुड़े मामलों की जांच की मांग पहले से उठ रही थी,
तो ठीक उसी समय फाइलों का जल जाना महज़ संयोग कैसे हो सकता है?
CBI जांच की उठी मांग
घटना के बाद आमजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने CBI जांच की खुलकर मांग की है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी और दोषी हमेशा की तरह सिस्टम की आड़ में बच निकलेंगे।
लोगों का यह भी कहना है कि आबकारी विभाग पहले से ही विवादों में घिरा रहा है, ऐसे में इस आग ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
प्रशासन की सफाई, जांच जारी
प्रशासन की ओर से फिलहाल आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है और मामले की जांच जारी होने की बात कही गई है। हालांकि, जनभावना को देखते हुए अब सिर्फ विभागीय जांच से संतोष होता नहीं दिख रहा।







