रायपुर।छत्तीसगढ़ सरकार ने कबीरपंथियों की आस्था से जुड़े ऐतिहासिक ग्राम दामाखेड़ा को नई पहचान देते हुए उसका नाम आधिकारिक रूप से बदल दिया है। अब यह गांव ‘कबीर धर्म नगर, दामाखेड़ा’ के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार की अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, ग्राम दामाखेड़ा के नाम परिवर्तन का फैसला 4 जून 2025 को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया था। इसके बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय से सहमति प्राप्त होने पर इस निर्णय को अंतिम मंजूरी दी गई। सामान्य प्रशासन विभाग ने 5 फरवरी 2026 को नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री बनने के बाद दामाखेड़ा प्रवास के दौरान, विश्व प्रसिद्ध सतगुरु कबीर संत समागम मेला में शामिल होकर गांव का नाम बदलने की घोषणा की थी। अब यह घोषणा औपचारिक रूप से लागू हो गई है।
कबीरपंथियों की आस्था का वैश्विक केंद्र
रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय मार्ग पर सिमगा से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित दामाखेड़ा को कबीरपंथियों के सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यह स्थान संत कबीर के सत्य, मानवता और समता के संदेश का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
वर्ष 1903 में कबीरपंथ के 12वें गुरु उग्रनाम साहब द्वारा यहां कबीर मठ की स्थापना की गई थी। तभी से यह क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कबीर मठ परिसर के केंद्र में वंशगुरु उग्रनाम साहब और गुरु माताओं की समाधियां स्थित हैं। इसके साथ ही कबीरपंथ के प्रथम वंशगुरु मुक्तामणि नाम साहब का मंदिर भी यहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख स्थल है।
मठ परिसर के सामने संगमरमर के चबूतरे पर कबीर पंथ का प्रतीक सफेद ध्वज लहराता है, जहां श्रद्धालु श्रद्धा-भाव से शीश नवाते हैं। परिसर की दीवारों पर कबीरदास के जीवन और उपदेशों को कलात्मक चित्रों व नक्काशी के माध्यम से दर्शाया गया है।
दामाखेड़ा कबीरपंथ की प्रमुख गद्दियों में से एक माना जाता है। यहां लगने वाले वार्षिक मेलों के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और दीक्षा कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पास स्थित कुदुरमाल में कबीरदास के प्रमुख शिष्य धरमदास के पुत्र चुड़ामनदास सहित अन्य गुरुओं की समाधियां भी मौजूद हैं।







