रायपुर।छत्तीसगढ़ में नशाबंदी के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल दुबे ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में राजनीति की आड़ में नशे का कारोबार बढ़ता जा रहा है।
अनिल दुबे ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में शराबबंदी को प्रमुख मुद्दा बताया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय केवल दिखावटी कार्रवाई की जा रही है। उनका आरोप है कि सरकार ने पूर्व आबकारी मंत्री के खिलाफ कार्रवाई कर खुद को सख्त दिखाने की कोशिश की, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आती है।
उन्होंने कहा कि पहले जहां इस कारोबार में पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठते थे, वहीं अब आर्थिक अपराध अन्वेषण से जुड़ी एजेंसियों तक पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। दुबे का कहना है कि प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ रही है और अब लोगों को खुद फैसला करना होगा।
इस दौरान महेंद्र कौशिक, छंन्नू साहू, रामेश्वर चौहान, मनोज देवांगन, जगदम्बा साहू, भुवनलाल पटेल, सतमन साय, लीलाधर डरसेन, श्रीमती राधा सिन्हा, रितु महंत और अनिता रात्रे सहित कई कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। सभी ने सरकार से नशाबंदी के मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की।
राजआंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि वे “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा” के माध्यम से गांव-गांव जाकर नशाबंदी के पक्ष में जनजागरूकता अभियान चलाएंगे। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य प्रदेश को नशे की बढ़ती समस्या से बचाने के लिए आम लोगों को संगठित करना है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और तेज किया जाएगा।



