नई दिल्ली।बॉलीवुड के लोकप्रिय कॉमेडियन और अभिनेता राजपाल यादव के लिए यह समय बेहद मुश्किल भरा साबित हुआ है। दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े आदेश के बाद उन्होंने आखिरकार जेल में आत्मसमर्पण कर दिया। मामला करीब 16 साल पुराना है, जो उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, वर्ष 2010 में इस फिल्म के निर्माण के लिए राजपाल यादव ने मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके चलते आर्थिक संकट गहराया और कर्ज चुकाने में देरी होती चली गई। इसी दौरान भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए।
कंपनी ने इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की। ट्रायल कोर्ट ने अभिनेता को 6 महीने की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए समझौते का अवसर दिया।
लेकिन कोर्ट की सख्ती तब बढ़ गई जब राजपाल यादव बार-बार किए गए वादों और तय शर्तों का पालन नहीं कर पाए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने कई बार राहत दी, लेकिन लगातार डिफॉल्ट को देखते हुए आखिरकार 4 फरवरी 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दे दिया।
अभिनेता की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि वे एक सप्ताह में 50 लाख रुपये का इंतजाम कर सकते हैं और अतिरिक्त समय दिया जाए, लेकिन हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में इससे इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बार-बार की गई लापरवाही पर अब कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
अंततः राजपाल यादव ने अदालत में यह बयान दिया कि वे उसी दिन आत्मसमर्पण करेंगे। इसके बाद उन्होंने जेल में सरेंडर कर दिया। अब आगे यह देखना होगा कि वे सजा पूरी करेंगे या किसी अन्य कानूनी विकल्प का सहारा लेते हैं।
यह घटना न सिर्फ अभिनेता के करियर बल्कि उनकी सार्वजनिक छवि के लिए भी एक बड़ा झटका मानी जा रही है।



