पटेवा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का उभार, रथयात्रा को मिला अभूतपूर्व जनसमर्थन

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से निकाली जा रही ‘छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा’ को ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा के 11वें दिन पटेवा क्षेत्र के करीब 10 गांवों — चौकबेड़ा, बम्बूहरडीह, केरामुड़ा, फूलवारी, बावनकेरा, दर्रीपाली, चिरको, तोरला, सलिहाभाठा और मानपुर — में रथयात्रा पहुंची, जहां लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

रथ यात्रा के गांव में प्रवेश करते ही छत्तीसगढ़ी संस्कृति और मातृभूमि के सम्मान में लोकप्रिय कवि और गायक स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया के जागरण गीतों से माहौल भावनात्मक और उत्साहपूर्ण हो गया। गीतों की गूंज सुनते ही ग्रामीणों की भीड़ रथ के स्वागत के लिए उमड़ पड़ी।

यात्रा के दौरान ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सभा आयोजित की गई। चौकबेड़ा, केरामुड़ा, बावनकेरा, दर्रीपाली, तोरला और सलिहाभाठा में आयोजित सभाओं में सैकड़ों लोगों ने संगठन की सदस्यता लेकर एकजुटता का संदेश दिया।

सभा को संबोधित करते हुए राज्य निर्माण संग्राम सेनानी और किसान नेता अशोक कश्यप ने कहा कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और परंपराओं का अपमान हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी और इसके ऐतिहासिक नायकों को न्याय दिलाने के लिए प्रदेशवासियों को एकजुट होकर शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना होगा।

इस अवसर पर रूपसिंह निषाद, ब्रज बिहारी साहू, लक्ष्मीप्रसाद साहू और अवधराम साहू सहित कई नेताओं ने भी अपने विचार रखे और छत्तीसगढ़ी अस्मिता की रक्षा के लिए सामाजिक एकता पर जोर दिया।

रथयात्रा के दौरान गांव-गांव में “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय”, “सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज जिंदाबाद” और “छत्तीसगढ़ के शोषकों, छत्तीसगढ़ छोड़ो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। महिलाओं की बड़ी भागीदारी इस यात्रा की खास विशेषता रही, जिसने अभियान को और मजबूती दी।

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