67 इंजीनियरों की नौकरी रद्द होते ही मचा हड़कंप, बिना डिग्री भर्ती केस में “बड़े खेल”

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक सख्त फैसले ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की नींद उड़ा दी है। बिना आवश्यक डिग्री के भर्ती किए गए 67 सब इंजीनियरों की नौकरी रद्द होते ही विभागीय गलियारों में अफरा-तफरी का माहौल है। भीतरखाने चर्चाएं हैं कि अब इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी से बचने और फाइलों को “सही जगह” लगाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ यहीं खत्म होने वाला नहीं है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कुछ बड़े और रसूखदार नाम भी जल्द ही जांच के दायरे में आ सकते हैं। यही वजह है कि विभाग के कुछ अधिकारी फिलहाल भारी दबाव में बताए जा रहे हैं।

मामला कोर्ट में था, फिर भी मिलते रहे प्रमोशन

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जब बिना डिग्री भर्ती का मामला हाईकोर्ट में लंबित था, तब भी विवादित सब इंजीनियरों को अहम पदों पर पदोन्नति मिलती रही।

एसडीओ (उप अभियंता) जैसे जिम्मेदारी वाले पदों पर प्रमोशन आखिर किसके संरक्षण में दिए गए—यह सवाल अब जोर पकड़ चुका है।

कहावत है, “शैय्या भय कोतवाल तो डर काहे का”, और यही कहावत इस मामले पर सटीक बैठती दिख रही है।

2012–13 की भर्ती, 2017 में कार्रवाई… फिर ठंडे बस्ते में

इन 67 सब इंजीनियरों की भर्ती वर्ष 2012–13 में हुई थी। शुरुआत से ही आरोप लगते रहे कि नियमों को दरकिनार कर बिना जरूरी शैक्षणिक योग्यता के नियुक्तियां की गईं।

मामले की शिकायत रायपुर के सिविल लाइन थाने तक पहुंची और वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार ने जांच के बाद इन्हें सेवा से हटाने का फैसला भी लिया था।

लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही कार्रवाई फाइलों में दबती चली गई।

अब हाईकोर्ट ने पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सभी अपात्र इंजीनियरों की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह फैसला न सिर्फ विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आने वाले दिनों में एक बड़े प्रशासनिक भूचाल के संकेत भी दे रहा है।

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