रायपुर।छत्तीसगढ़ की मिट्टी, भाषा और अस्मिता की रक्षा के संकल्प के साथ निकली “छत्तीसगढ़ी महतारी अस्मिता रथयात्रा” आज अपने 10वें दिन भी पूरे जोश के साथ जारी रही। सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज के बैनर तले चल रही यह रथयात्रा सिरपुर अंचल के बीहड़ जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे आदिवासी बहुल गांवों तक पहुंची।
रथयात्रा ने सुकुलवाय, नंदबारू, केसलडीह, बंदोरा, खिरसाली, अचानकपुर, खड़उपार और फुसेराडीह सहित कुल 9 गांवों का भ्रमण किया। जैसे ही छत्तीसगढ़ी महतारी की रथ इन गांवों में पहुंची, वहां किसानों और महिलाओं ने आरती उतारकर श्रद्धा के साथ स्वागत किया। पूरे अंचल में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और अस्मिता के प्रति गहरी आस्था देखने को मिली।
इन गांवों में आयोजित सभाओं में सैकड़ों ग्रामीणों ने सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज की सदस्यता भी ग्रहण की। सभाओं को राज्य आंदोलनकारी एवं रथयात्रा के प्रभारी लालाराम वर्मा, आदिवासी नेता अशोक कश्यप, अवधराम साहू और लक्ष्मीनारायण निषाद ने संबोधित किया।
मुख्य वक्ता लालाराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह इस अंचल के लगभग 40 गांवों को हाथियों के आतंक से राहत दिलाने का संघर्ष सफल रहा और कोडार बांध जैसे जीवनदायिनी सिंचाई परियोजना को बचाने के लिए अवैध अनुबंध रद्द करवाया गया, उसी तरह यह रथयात्रा भी छत्तीसगढ़ी महतारी की अस्मिता की रक्षा के लिए निर्णायक साबित होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध रूप से संचालित करणी कृपा स्टील पावर प्लांट के कारण क्षेत्र में जल, जंगल, जमीन, फसल और जनजीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है, साथ ही विश्व धरोहर सिरपुर भी खतरे में है। रथयात्रा का उद्देश्य इन सभी मुद्दों पर जनजागरण कर एकजुट संघर्ष खड़ा करना है।
लालाराम वर्मा ने लोगों से अपील की कि वे पार्टी और समाज की सीमाओं से ऊपर उठकर सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज से जुड़ें और अपने हक व भविष्य की लड़ाई में एकजुट हों।
पूरे क्षेत्र में “छत्तीसगढ़ी महतारी की जय”, “सर्व छत्तीसगढ़िया समाज जिंदाबाद” और “छत्तीसगढ़ के शोषकों, छत्तीसगढ़ छोड़ो” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।



