SC का बड़ा फैसला: मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग टॉयलेट नहीं तो स्कूल की मान्यता खत्म

Madhya Bharat Desk
3 Min Read

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने छात्राओं के स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़े एक अहम मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि देश के हर स्कूल में छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। आदेश का पालन न करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी—हर प्रकार के स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय अनिवार्य रूप से हों। इसके साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अनुकूल टॉयलेट व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया गया है।

‘मासिक धर्म स्वास्थ्य जीवन के अधिकार का हिस्सा’

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निजी स्कूल इन निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनकी मान्यता समाप्त की जा सकती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकारें या केंद्र शासित प्रदेश छात्राओं को शौचालय और मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो उन्हें भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।

टॉयलेट में पानी, साबुन और प्राइवेसी अनिवार्य

पीठ ने आदेश में कहा कि देश के हर स्कूल—चाहे वह शहरी क्षेत्र में हो या ग्रामीण—में इस्तेमाल योग्य पानी की कनेक्टिविटी के साथ कार्यशील और स्वच्छ शौचालय होने चाहिए। सभी टॉयलेट इस तरह डिजाइन और मेंटेन किए जाएं कि छात्रों की निजता, सुरक्षा और पहुंच सुनिश्चित हो।

साथ ही हर शौचालय में हाथ धोने की सुविधा, साबुन और साफ पानी हर समय उपलब्ध होना जरूरी होगा।

ASTM मानकों के अनुसार सैनिटरी पैड

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि स्कूलों में उपलब्ध कराए जाने वाले सैनिटरी पैड ASTM D-694 मानकों के अनुरूप बने OXO बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन हों। ये पैड छात्राओं को आसानी से उपलब्ध हों, इसके लिए टॉयलेट के अंदर सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाने की सलाह भी दी गई है।

जहां मशीन तुरंत लगाना संभव न हो, वहां स्कूल परिसर में किसी तय स्थान या जिम्मेदार अधिकारी के पास इन पैड्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

यह फैसला सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड और सुरक्षित टॉयलेट सुविधा उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment