रायपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर नगर निगम द्वारा प्रस्तावित भूमि पूजन कार्यक्रम अचानक रद्द किए जाने से सियासी हलकों में हलचल मच गई है। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, टेंट, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए एडवांस भुगतान भी किया जा चुका था, बावजूद इसके ऐन वक्त पर आयोजन को निरस्त कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर भारी नाराजगी उभरकर सामने आई। विवाद की जड़ यह रही कि निमंत्रण कार्ड में पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल तथा केंद्रीय मंत्री तोखन साहू का नाम शामिल नहीं किया गया था। यही नहीं, दोनों नेताओं को व्यक्तिगत रूप से सूचना देने की भी कोशिश नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि मामला जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंचा, तो पार्टी नेतृत्व ने नाराजगी जताई। हालात को बिगड़ने से पहले संभालने के उद्देश्य से कार्यक्रम को पूरी तरह रद्द करने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
नगर निगम कमिश्नर प्रकाश सुरेश्वर ने कार्यक्रम रद्द किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि आयोजन में कुछ नए प्रोजेक्ट जोड़ने की योजना थी, इसलिए इसे स्थगित किया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि निमंत्रण पत्र में अमर अग्रवाल और तोखन साहू का नाम शामिल नहीं था। जब उनसे वरिष्ठ नेताओं का नाम न होने के कारणों पर सवाल किया गया, तो वह कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि यदि उन्हें आमंत्रित भी किया जाता, तब भी वे कार्यक्रम में शामिल नहीं होते। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का निर्णय सोच-समझकर लिया गया होगा और वे किसी भी तरह के विवाद से दूर रहना पसंद करते हैं।
वहीं केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने बताया कि वे उस समय मुख्यमंत्री के साथ मौजूद थे और उन्हें निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि उनका नाम निमंत्रण पत्र में क्यों नहीं था, इस पर वे कुछ नहीं कह सकते।
गौरतलब है कि इससे पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान अमर अग्रवाल की कुर्सी को पीछे लगाए जाने को लेकर विवाद सामने आ चुका है। उस मामले में अमर अग्रवाल ने स्पष्ट किया था कि यदि मंत्री उपस्थित नहीं हों, तो उनकी कुर्सियों पर विधायकों का नाम अंकित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे कभी किसी और की कुर्सी पर नहीं बैठते और उस दिन भी उन्होंने ऐसा ही किया था।



