रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्कूलों में मध्याह्न भोजन तैयार करने वाली रसोइया महिलाएं बीते सात दिनों से धरने पर बैठी हैं। बेहद कम मानदेय के खिलाफ यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रसोइयों का आरोप है कि उन्हें पूरे दिन की मेहनत के बदले मात्र 66 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में नाकाफी है।
धरनास्थल पर हजारों की संख्या में महिलाएं मौजूद हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद ये रसोइया महिलाएं रातें खुले आसमान के नीचे गुजारने को मजबूर हैं। ठंड से बचने के लिए महिलाएं अपने साथ कंबल और जरूरी सामान लेकर आई हैं, लेकिन हालात देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए।
रसोइयों का कहना है कि वे रोज स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं, फिर भी उन्हें शासकीय छुट्टियों को छोड़कर किसी प्रकार की छुट्टी नहीं मिलती। यहां तक कि घर में किसी की मृत्यु जैसी परिस्थिति में भी उन्हें काम पर आना पड़ता है, इसके बावजूद मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाती।
महिलाओं ने मांग की है कि उन्हें कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार मानदेय दिया जाए और न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाया जाए। उनका कहना है कि 66 रुपये में न तो घर चल सकता है और न ही सम्मानजनक जीवन संभव है।
रसोइया महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।







