कोल ब्लॉक से रामगढ़ की विरासत पर संकट, सिंहदेव ने जताई गहरी आपत्ति

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के रामगढ़ क्षेत्र की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत एक बार फिर खतरे में है। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को दी गई मंजूरी ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे ऐतिहासिक धरोहर और हाथियों के प्राकृतिक आवास के लिए खतरा बताया है।

विवरण:

टीएस सिंहदेव का कहना है कि कोल ब्लॉक की दूरी को लेकर आंकड़ों में हेरफेर किया गया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर लेमरु हाथी रिजर्व और रामगढ़ पर्वत से दूरी कम बताई ताकि परियोजना को आसानी से स्वीकृति मिल जाए। यह न केवल पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि रामगढ़ जैसी ऐतिहासिक जगह की पहचान भी खतरे में पड़ जाएगी।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय प्रभाव:

रामगढ़ पर्वत न केवल पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। साथ ही, लेमरु हाथी रिजर्व जैसे प्रोजेक्ट हाथियों के संरक्षण के लिए बनाए गए हैं, जिन पर इस तरह की कोयला परियोजनाएं प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। कोल ब्लॉक परियोजना से प्रदूषण, वनों की कटाई और जैव विविधता को भारी नुकसान होने की आशंका है।

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