रायपुर–विशाखापत्तनम भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ को अपनी पहली 2.79 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल मिलने जा रही है। पहाड़ी इलाके के भीतर बन रही यह अत्याधुनिक सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और दक्षिण छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए तैयार है।
यह ट्विन टनल गोविंदपुर के समीप सीमा क्षेत्र में निर्मित की जा रही है, जहां इसके प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं। परियोजना का निर्माण हैदराबाद की केएमवी प्रोजेक्ट कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जिसे 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो एक सुरंग का ब्रेकथ्रू कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी सुरंग में हेडिंग का काम समाप्त हो गया है। अब केवल लगभग 300 मीटर बेंचिंग का कार्य शेष है, जिसे फरवरी तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद दोनों सुरंगें पूरी तरह आरपार हो जाएंगी।
सुरक्षा के लिहाज से इस ट्विन टनल को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। सुरंग के भीतर दोनों ओर कुल 14 हाई-रिजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत केवल अधिकृत श्रमिकों को ही टनल में प्रवेश की अनुमति है और उनकी बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई है। आम नागरिकों के लिए निर्माण स्थल से करीब आधा किलोमीटर पहले ही प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
आपात स्थितियों से निपटने के लिए दोनों समानांतर सुरंगों को आपस में जोड़ने हेतु हर 500 मीटर पर 7.5 मीटर चौड़े क्रॉस पैसेज बनाए गए हैं। कुल पांच क्रॉस पैसेज तैयार किए जा रहे हैं, जो किसी भी आपदा की स्थिति में एक टनल से दूसरी टनल में सुरक्षित निकासी का रास्ता प्रदान करेंगे। टनल सेफ्टी विशेषज्ञ संजय शर्मा के अनुसार, इन क्रॉस पैसेज को फायर-प्रूफ दरवाजों से सुरक्षित किया जाएगा, जिन्हें केवल आपात स्थिति में ही खोला जा सकेगा।
आने और जाने के लिए अलग-अलग दो सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनकी चौड़ाई लगभग 14 मीटर रखी गई है। सुरंग के भीतर अधिकतम 15 मीटर चौड़ाई, 11.5 मीटर का तीन लेन कैरिजवे और करीब 8.5 मीटर ऊंचाई सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही रोशनी, वेंटिलेशन और ट्रैफिक डाइवर्जन के लिए आधुनिक सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह ट्विन टनल परियोजना पूरी होने के बाद रायपुर से विशाखापत्तनम की यात्रा न केवल कम समय में पूरी होगी, बल्कि पहाड़ी इलाकों में यातायात पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।



