बर्बाद फसल लेकर कलेक्टरेट घेरेंगे किसान, जिलाधीश छुपकर क्यों बैठे?: अनिल दुबे

Madhya Bharat Desk
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रायपुर।अवैध उद्योगों और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन एक बार फिर उग्र रूप लेने जा रहा है। महासमुंद जिले में प्रदूषण फैलाने वाले कथित अवैध उद्योगों से धान की फसल बर्बाद होने का आरोप लगाते हुए किसान 16 दिसंबर को ट्रैक्टर-ट्रालियों में खराब धान लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे। किसान माननीय राममनोहर लोहिया चौक से दोपहर 12 बजे प्रदर्शन शुरू करेंगे।

छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे ने आरोप लगाया है कि करणी कृपा और नूतन इस्पात जैसे उद्योग बिना वैध अनुमति के संचालित हो रहे हैं, जिनके प्रदूषण से आसपास के गांवों में किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट और मुख्यमंत्री के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

अनिल दुबे का आरोप है कि महासमुंद के जिलाधीश ने किसानों की शिकायतों पर चुप्पी साध रखी है और अवैध उद्योग संचालकों को संरक्षण दिया जा रहा है। किसानों द्वारा दिए गए शपथपत्र और दस्तावेजों को भी कथित रूप से आगे नहीं भेजा गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

किसान मोर्चा का कहना है कि बीते कई महीनों से हर मंगलवार को प्रशासन को प्रमाण सौंपे जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए। प्रदूषण से प्रभावित किसान परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

मामला तब और गंभीर हो गया जब छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगे। किसान नेताओं का कहना है कि जहां अवैध उद्योगों पर कार्रवाई में प्रशासन सुस्त है, वहीं सांस्कृतिक प्रतीकों पर त्वरित कार्रवाई कर दी गई।

किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जिलाधीश पर अवमानना और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा। 16 दिसंबर को होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व अनिल दुबे सहित कई किसान और सामाजिक नेता करेंगे।

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