PMGSY में 218 करोड़ का घोटाला : दोषी अधिकारी बचेंगे या कार्रवाई होगी?

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। योजना में ठेकेदारों द्वारा जमा की जाने वाली EMD और APS जैसी सुरक्षा राशि ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से जमा होती है, लेकिन आरोप है कि इन पैसों को योजना से बाहर अन्य कार्यों में खर्च कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, यह अनियमितता उस अवधि की है जब आलोक कटियार छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (CGRRDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) थे और बारी चीफ इंजीनियर के पद पर पदस्थ थे। ठेकेदारों का कहना है कि उनकी जमा की गई राशि बैंक से निकालकर नियमों को ताक पर रख दिया गया, जिससे आज तक उन्हें उनका वैध भुगतान नहीं मिल सका।

हालात यह हैं कि पिछले तीन वर्षों से ठेकेदार अपने ही पैसों की वापसी के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वर्तमान में CGRRDA द्वारा वित्त विभाग से 218 करोड़ रुपये की मांग की गई है, लेकिन वित्त विभाग ने साफ कह दिया है कि जब तक पूर्व में हुई गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भुगतान संभव नहीं है।

छत्तीसगढ़ कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने शासन से कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की EMD और APS की राशि तत्काल लौटाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र प्रवर्तित योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ना है। सड़क निर्माण के बाद रखरखाव और वार्षिक संधारण की जिम्मेदारी राज्य शासन की होती है। ऐसे में सुरक्षा निधि, निष्पादन गारंटी और GST जैसी मदों में अनियमितता न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि योजना की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती है।

अब सवाल यह है कि क्या शासन दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर ठेकेदारों को इसी तरह अपने ही पैसे के लिए भटकना पड़ेगा?

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