मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का गंभीर मुद्दा सामने आया। ये मामला छिंदवाड़ा से जुड़ा है, जहां जहरीला कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की हालत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह मामला सदन में उठा, विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कड़ी नाराजगी जताई।
इसी दौरान इंदौर के एमवाय अस्पताल में बच्चों को चूहों के काटने की घटना पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि यह सीधा-सीधा अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है, इसलिए सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि वे सिर्फ बच्चों की मौत पर दुख व्यक्त कर रहे हैं। इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की तरह न देखा जाए, बल्कि इसे इंसानियत का सवाल माना जाए। जब विपक्ष ने आठ BLO की मौतों का मुद्दा उठाया तो मंत्री सारंग ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शोक प्रस्ताव के समय केवल श्रद्धांजलि पर ही चर्चा होनी चाहिए।
इधर, बीएलओ की मौत, एसआईआर में गड़बड़ी और काम के दबाव जैसे मुद्दों को उठाते हुए कांग्रेस ने सरकार को जिम्मेदार बताया। वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी अपनी सरकार से ही यह स्वीकार किया कि कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को सही जानकारी नहीं दे पा रहे।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि शोक प्रस्ताव का उद्देश्य केवल सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि देना होता है। उन्होंने सभी सदस्यों को इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी।
पूरे सत्र के दौरान माहौल गंभीर और बहसपूर्ण रहा। विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल चार दिन बैठकें होंगी। 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर स्थानीय अवकाश के कारण सदन की बैठक नहीं होगी।







