खाद संकट का कहर: दो दिन की लाइन, कड़ाके की ठंड और आदिवासी महिला की मौत

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

मध्यप्रदेश के गुना जिले में खाद संकट के बीच एक आदिवासी महिला की मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम कुसेपुर की रहने वाली 50 वर्षीय भूरियाबाई पिछले दो दिनों से बागेरी खाद वितरण केंद्र के बाहर यूरिया के लिए लाइन में लगी हुई थीं। लगातार इंतजार, कड़ाके की ठंड और रातभर खुले आसमान के नीचे रुके रहने से उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

मौजूद ग्रामीणों और परिजनों ने एंबुलेंस को कई बार कॉल किया, लेकिन मदद समय पर नहीं पहुंची। मजबूर होकर एक किसान ने अपने निजी वाहन से महिला को बमोरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालत नाजुक होने पर उन्हें रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि खाद की किल्लत और कुप्रबंधन के चलते लोगों को रातभर केंद्रों पर रुकना पड़ता है। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बागेरी केंद्र पर 274 रुपये की खाद की बोरी ब्लैक में 400 रुपये तक बेची जा रही है।

इसी दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का दौरा भी क्षेत्र में चल रहा था। महिला की मौत की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और पीड़ित परिवार की सहायता के निर्देश दिए गए। हालांकि, खाद की कमी और वितरण को लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

जिला कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने दावा किया कि महिला को गंभीर शुगर की समस्या थी, जिसके कारण मौत हुई है। साथ ही स्वीकार किया कि देर रात एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। किसानों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया है और कहा कि समय पर मेडिकल मदद मिल जाती तो भूरियाबाई की जान बच सकती थी।

इस घटना ने खाद वितरण व्यवस्था, एंबुलेंस सेवा और सरकारी दावों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment