IAS संतोष वर्मा को ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी करना पड़ा भारी

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। अजाक्स मध्यप्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष और आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए कथित बयान—“जब तक ब्राह्मण अपनी बेटी दान न करे, तब तक आरक्षण मिले”—के वीडियो के वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ में आक्रोश तेज हो गया है। समाज का कहना है कि यह टिप्पणी न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है, जिसे किसी भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को बिलकुल नहीं कहना चाहिए था। इस टिप्पणी के बाद ब्राह्मण समाज में असंतोष फैल गया है और विभिन्न संगठनों ने इसे समाज की प्रतिष्ठा पर सीधी चोट बताया है।

रविवार को ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल रायपुर जिला कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. लाल उम्मेद सिंह के कार्यालय पहुँचा और आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 298, 299, 153, स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत संतोष वर्मा पर तत्काल अपराध पंजीबद्ध किया जाए। समाज का कहना है कि वर्मा एक प्रशासनिक अधिकारी होते हुए भी इस प्रकार की टिप्पणी कर रहे हैं, जो उनकी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाती है और इससे समाज में जातीय विद्वेष एवं विवाद की स्थिति उत्पन्न होने का खतरा है।

ज्ञापन की एक प्रति छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को भी भेजी गई है, जिसमें वर्मा पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने पहुँचे प्रतिनिधिमंडल में डॉ. सुरेश शुक्ला, सुरेश मिश्रा, अरुण शुक्ला, प्रभात मिश्रा, श्रीमती विभा तिवारी, भारती शर्मा, प्रीति शुक्ला, मृणालिका ओझा, सुनीता मिश्रा, सरिता शर्मा, ज्ञानेश शर्मा, सुरेश शुक्ला, अरुण शुक्ला, रज्जन अग्निहोत्री, नटराज शर्मा, शीबू शुक्ला, नितिन कुमार झा, योगेश शर्मा, राजेंद्र तिवारी, हरीश शर्मा, राजेंद्र ओझा, बी. के. शुक्ला, राजू शर्मा, राहुल शुक्ला, सुनील पांडेय और सौरभ शर्मा सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे। सभी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द कार्रवाई नहीं की जाती, तो ब्राह्मण समाज पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन के लिए तैयार है। समाज का कहना है कि यह केवल एक टिप्पणी का मामला नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा, समाज की प्रतिष्ठा और सामाजिक सौहार्द का सवाल है।

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