प्रदेश में धान खरीदी पर संकट, हड़ताल पर कर्मचारी, अब तक टोकन भी नहीं बटें

Madhya Bharat Desk
2 Min Read

रायपुर: प्रदेश में धान खरीदी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकार की तैयारियां अब सवालों के घेरे में हैं। प्रदेश की 15 हजार से अधिक सहकारी समितियों के प्रबंधक, खरीदी प्रभारी और ऑपरेटरों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी है, जबकि 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होनी है। हड़ताल ने राज्य सरकार की योजनाओं की ज़मीनी सच्चाई उजागर कर दी है। अब तक सॉफ्टवेयर का ट्रायल रन तक नहीं हुआ। किसानों को टोकन वितरण की प्रक्रिया भी पूरी तरह ठप है।

धान खरीदी की तैयारी अधर में
सरकार दावा करती रही कि इस बार धान खरीदी की सारी व्यवस्थाएं समय पर होंगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि अब तक सॉफ्टवेयर का ट्रायल रन तक नहीं हुआ। किसानों को टोकन वितरण की प्रक्रिया भी पूरी तरह ठप है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि जब सोसाइटी कर्मी पहले से ही आंदोलन की चेतावनी दे रहे थे, तो सरकार ने समय रहते समाधान क्यों नहीं निकाला? क्या सरकार ने प्रशासनिक लापरवाही से किसानों को परेशानी में धकेल दिया है?

वैकल्पिक व्यवस्था या औपचारिक जुगाड़?
हड़ताल से निपटने के लिए सरकार ने अन्य विभागों के कर्मचारियों को तैनात करने का फैसला लिया है। खाद्य विभाग सचिव ने सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर कहा है कि राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारी समितियों में कार्यभार संभालेंगे। लेकिन यहाँ भी सवाल उठते हैं- क्या ये अधिकारी धान खरीदी प्रक्रिया की समझ रखते हैं? क्या अचानक की गई तैनाती से व्यवस्था सुचारु चल पाएगी या यह सिर्फ दिखावटी समाधान है?

किसानों पर बढ़ता तनाव
धान खरीदी की तिथि करीब आते-आते किसान असुरक्षा और अनिश्चितता में हैं। टोकन वितरण न होने से उन्हें यह भी पता नहीं कि कब और कहां धान बेचना है।
किसानों कि माने तो सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती तो धान खरीदी व्यवस्था चरमराने में देर नहीं लगेगी।

Share on WhatsApp

Share This Article
Leave a Comment