छत्तीसगढ़ में आगामी चुनावों की तैयारी एक नए मोड़ पर पहुँच गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का औपचारिक ऐलान करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाता सूची को बिल्कुल त्रुटिरहित और अपडेटेड बनाना ही सर्वोच्च प्राथमिकता है। 27 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार यह प्रक्रिया वर्ष 2026 की पात्रता तिथि 1 जनवरी 2026 को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है।
इस कार्यक्रम के तहत 28 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई पुनरीक्षण प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम दिन राज्यभर की मतदाता सूची का संपूर्ण और अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इस अवधि में बूथ स्तर पर नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पुरानी प्रविष्टियों में सुधार, गलत नाम हटाने, और बीएलओ स्तर पर सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।
लेकिन इस बार चुनाव आयोग ने सबसे सख्त कदम कर्मचारियों की अनुशासन व्यवस्था को लेकर उठाया है। लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13(सीसी) के तहत पुनरीक्षण कार्य में लगे अधिकारी और कर्मचारी आयोग के अधीन माने जाएंगे। इसका मतलब यह हुआ कि इस अवधि में वे केवल और केवल चुनाव आयोग के प्रति उत्तरदायी रहेंगे।
इससे भी आगे बढ़कर आयोग ने छुट्टियों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO), छत्तीसगढ़ की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को छुट्टी मंजूर नहीं की जाएगी। जिला कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी केवल उन्हीं छुट्टी प्रस्तावों को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेज सकेंगे जिन्हें वे स्वयं आवश्यक मानकर विशेष अनुशंसा के साथ प्रस्तुत करें।
यह भी साफ कर दिया गया है कि छुट्टी मंजूरी का अंतिम निर्णय केवल राज्य के CEO स्तर से ही होगा। आयोग का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले पुनरीक्षण चक्रों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण कई जिलों में मतदाता सूची अपडेट में विलंब और त्रुटियाँ सामने आई थीं।
कुल मिलाकर, आने वाले महीनों में छत्तीसगढ़ की चुनावी तैयारियाँ कर्मचारियों की संपूर्ण उपस्थिति और अनुशासन पर टिकी रहेंगी। आयोग का दृढ़ निर्देश है—
“मतदाता सूची में चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी, इस बार तैयारी जमकर होनी चाहिए।”







