छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर विवादों में घिर गई है। प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते पर आदिवासी समुदाय ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र (Fake Caste Certificate) बनवाकर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की है। इस मामले के उजागर होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।
आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर आरोप लगाया कि विधायक का जाति प्रमाणपत्र पति पक्ष के आधार पर जारी किया गया, जबकि भारतीय कानून के अनुसार जाति प्रमाणपत्र केवल पिता पक्ष की जाति के आधार पर ही जारी किया जा सकता है। उनका कहना है कि पति के आधार पर प्राप्त प्रमाणपत्र किसी भी स्थिति में वैध नहीं माना जा सकता।
समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले ही बलरामपुर और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों को दी जा चुकी है। जांच की मांग पर प्रशासन ने प्रारंभिक परीक्षण किया था, जिसमें पाया गया कि विधायक द्वारा प्रस्तुत जाति प्रमाणपत्र से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या प्रमाण मौजूद नहीं हैं। इतना ही नहीं, अंबिकापुर, बलरामपुर और सूरजपुर के अभिलेखागारों में भी विधायक के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े किसी भी दस्तावेज का रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे उसकी प्रामाणिकता पर गहरा सवाल उठ गया है।
आदिवासी समाज ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक जांच शुरू नहीं हुई है। समुदाय ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़ा जन आंदोलन करेंगे।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल विधायक की साख पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नई बहस छेड़ दी है कि आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग पर किस तरह अंकुश लगाया जाए।






