पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गरमाता जा रहा है। इस बार महागठबंधन ने एक अनोखी रणनीति अपनाई है — बिना सीट शेयरिंग (सीट बंटवारे) की औपचारिक घोषणा किए ही चुनावी मैदान में उतरने की।
- पहले चरण का मतदान 6 नवंबर, दूसरा चरण 11 नवंबर को
- किन सीटों पर महागठबंधन के दल आमने-सामने
- निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं रितु जायसवाल
- पप्पू यादव का हमला: “गठबंधन धर्म का पालन कीजिए”
- एनडीए ने बनाया मुद्दा, भाजपा बोली – ‘मतदाता सब देख रहे हैं’
- राजनीतिक विश्लेषण: अंदरूनी मतभेद बना सकता है नुकसान
महागठबंधन के सभी घटक दलों ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है, लेकिन सीटों का बंटवारा तय नहीं हो सका। इससे गठबंधन के भीतर मतभेद और टकराव की स्थिति बन गई है।
पहले चरण का मतदान 6 नवंबर, दूसरा चरण 11 नवंबर को
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में मतदान की घोषणा की है।
पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा।
लेकिन, अब तक महागठबंधन ने सीट बंटवारे का कोई आधिकारिक एलान नहीं किया है।
इस बीच, राजद ने 143, कांग्रेस ने 60, भाकपा (माले) ने 20, वीआईपी ने 15, सीपीआई ने 9, सीपीएम ने 4 और आईआईपी ने 3 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
यानी कुल मिलाकर 243 सीटों पर 254 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे 11 सीटों पर फ्रेंडली फाइट (आंतरिक टकराव) की स्थिति बन गई है।
किन सीटों पर महागठबंधन के दल आमने-सामने
सीट बंटवारा न होने की वजह से कई विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं।
कुछ प्रमुख सीटें जहां यह टकराव साफ दिख रहा है –
| विधानसभा सीट | मुकाबला | प्रत्याशी |
|---|---|---|
| कहलगांव | राजद बनाम कांग्रेस | रजनीश यादव (राजद) बनाम प्रवीण कुशवाहा (कांग्रेस) |
| तारापुर | राजद बनाम वीआईपी | अरुण शाह (राजद) बनाम सकलदेव सिंह (वीआईपी) |
| बछवाड़ा | कांग्रेस बनाम सीपीआई | प्रकाश दास (कांग्रेस) बनाम अवधेश कुमार राय (सीपीआई) |
| बिहारशरीफ | कांग्रेस बनाम सीपीआई | उमैर खान (कांग्रेस) बनाम शिव प्रसाद यादव (सीपीआई) |
| राजपाकर | कांग्रेस बनाम सीपीआई | प्रतिमा कुमारी (कांग्रेस) बनाम मोहित पासवान (सीपीआई) |
| वैशाली | राजद बनाम कांग्रेस | अजय कुशवाहा (राजद) बनाम इंजीनियर संजीव सिंह (कांग्रेस) |
| बाबूबरही | राजद बनाम वीआईपी | अरुण कुशवाहा (राजद) बनाम बिंदु गुलाब यादव (वीआईपी) |
| नरकटियागंज | कांग्रेस बनाम राजद | दीपक यादव (कांग्रेस) बनाम शाश्वत केदार पांडेय (राजद) |
| चैनपुर | राजद बनाम वीआईपी | ब्रज किशोर बिंद (राजद) बनाम बालगोविंद बिंद (वीआईपी) |
| बेलदौर | कांग्रेस बनाम आईआईपी | मिथिलेश निषाद (कांग्रेस) बनाम अनीष चौहान (आईआईपी) |
| करगहर | कांग्रेस बनाम सीपीआई | संतोष मिश्रा (कांग्रेस) बनाम महेंद्र प्रसाद गुप्ता (सीपीआई) |
इन सभी सीटों पर महागठबंधन के भीतर ‘फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिल रही है।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं रितु जायसवाल
महागठबंधन में टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया है।
2020 में राजद के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं रितु जायसवाल इस बार टिकट न मिलने से नाराज होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर आई हैं।
उनके बगावती रुख ने महागठबंधन के अंदरूनी संकट को और गहरा कर दिया है।
पप्पू यादव का हमला: “गठबंधन धर्म का पालन कीजिए”
पूर्णिया के सांसद और कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने महागठबंधन की स्थिति पर तीखा बयान दिया है।
उन्होंने कहा,
“12 सीटों पर दोहरे उम्मीदवार उतारना गठबंधन की एकता के खिलाफ है। अगर ऐसे ही टिकट बांटे जाएंगे तो गठबंधन टूट जाएगा। कांग्रेस को इस पर गंभीर निर्णय लेना चाहिए।”
उन्होंने राजद नेतृत्व पर गठबंधन धर्म न निभाने का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह के फैसलों से जनता में गलत संदेश जा रहा है।
एनडीए ने बनाया मुद्दा, भाजपा बोली – ‘मतदाता सब देख रहे हैं’
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा,
“जो गठबंधन अब तक सीटों का बंटवारा नहीं कर सका, वो बिहार की सरकार कैसे चलाएगा? जनता सब देख रही है — टिकटों की खरीद-फरोख्त और अंदरूनी कलह दोनों।”
एनडीए नेताओं का कहना है कि यह ‘महागठबंधन नहीं, बल्कि मतभेदों का समूह’ बन चुका है।
राजनीतिक विश्लेषण: अंदरूनी मतभेद बना सकता है नुकसान
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बिना स्पष्ट सीट बंटवारे के चुनाव में उतरना महागठबंधन के लिए जोखिम भरा कदम है।
‘फ्रेंडली फाइट’ वाली सीटों पर वोटों का बंटवारा सीधा फायदा एनडीए को दे सकता है।
अब देखना यह होगा कि क्या महागठबंधन अंतिम समय में सीटों पर समझौता कर पाता है या फिर ये मतभेद चुनावी नतीजों पर भारी पड़ेंगे।
बिना सीट बंटवारे के चुनाव में उतरकर महागठबंधन ने राजनीतिक जोखिम मोल लिया है। जहां एनडीए इसे मुद्दा बना चुका है, वहीं अंदरूनी कलह से निपटना गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।







