छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 मासूम बच्चे अपनी माताओं संग कैद, रिपोर्ट में देशभर में छठा स्थान

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। देशभर की जेलों में महिला कैदियों के साथ उनके छोटे बच्चों के रहने की स्थिति को लेकर हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ का इस मामले में छठा स्थान है, जहां 60 बच्चे अपनी माताओं के साथ जेलों में रह रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, जहां 311 महिला कैदी अपने बच्चों सहित जेलों में हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल (170), बिहार (167), मध्यप्रदेश (126) और झारखंड (84) का स्थान है।
छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद 60 महिला कैदी अपने छोटे बच्चों के साथ रह रही हैं, जो उनके मानसिक और सामाजिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही जेल प्रशासन बच्चों के लिए आंगनबाड़ी, पोषण और शिक्षा की सुविधाओं का दावा करता है, लेकिन जेल का वातावरण बच्चों के सर्वांगीण विकास के अनुकूल नहीं है।

मां के अपराध की सजा मासूमों को भी

इन मासूमों ने कोई गलती नहीं की, लेकिन अपनी माताओं के अपराध की सजा वे भी भुगत रहे हैं। नियमों के मुताबिक, 6 साल तक के बच्चों को उनकी मां के साथ जेल में रहने की अनुमति है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये आंकड़े 31 दिसंबर 2023 तक के हैं।

देशभर में 1,191 बच्चे जेल में रह रहे अपनी मां के साथ

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, देश की जेलों में 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ रह रही हैं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी हैं, जिनके साथ 1,191 बच्चे हैं।
वहीं, 249 दोष सिद्ध महिला कैदियों के साथ 272 बच्चे जेलों में हैं। यह आंकड़ा बच्चों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

“जेल का माहौल बच्चों के लिए अनुकूल नहीं”

बाल अधिकार कार्यकर्ता सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को ऐसे बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल, शिक्षा और पोषण की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जेल का वातावरण न तो सुरक्षित है और न ही मानसिक विकास के लिए उपयुक्त।

कई राज्यों में बाल संरक्षण नीति लागू की गई है, लेकिन यह समान रूप से देशभर में प्रभावी नहीं हो पा रही है।

परवरिश और शिक्षा को लेकर चिंता

बाल अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में खेल, शिक्षा और पोषण की सीमित सुविधाएं बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा केंद्र बनाए गए हैं, मगर वे पर्याप्त नहीं हैं।

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