बिहार विधानसभा चुनाव में अमौर सीट को लेकर चल रही सियासी उथल-पुथल पर आखिरकार विराम लग गया है। जनता दल (यूनाइटेड) ने एक बार फिर अपने पुराने भरोसेमंद नेता सबा जफर पर विश्वास जताते हुए उन्हें एनडीए का अंतिम प्रत्याशी घोषित किया है।
बीते 72 घंटों से अमौर सीट पर टिकट विवाद ने नया मोड़ ले लिया था। शनिवार को जदयू के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट और कुछ नेताओं ने पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली को प्रत्याशी घोषित कर दिया था, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई।
हालांकि रविवार को धमदाहा विधायक एवं मंत्री लेसी सिंह के आवास पर हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विवाद को खत्म कर दिया गया। इस दौरान लेसी सिंह, साबिर अली और सबा जफर तीनों मौजूद रहे।
साबिर अली ने मानी ‘गलतफहमी’ की बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में साबिर अली ने स्पष्ट किया कि टिकट को लेकर फैली खबर महज गलतफहमी थी। उन्होंने कहा, “पार्टी के आधिकारिक हैंडल से गलती से मेरा नाम पोस्ट कर दिया गया था। वास्तव में ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ था।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। “अब मैं पूर्णिया में फिर से पार्टी के लिए काम करने को तैयार हूं,” उन्होंने कहा।
लेसी सिंह ने किया अंतिम ऐलान
मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि, “साबिर अली हमारे पुराने साथी हैं, लेकिन अमौर से एनडीए का अधिकृत प्रत्याशी सबा जफर ही होंगे। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।”
सबा जफर ने जदयू नेतृत्व का धन्यवाद देते हुए कहा कि वे पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगे।
स्थानीय पकड़ और रणनीति पर भरोसा
जदयू का यह फैसला इस बात का संकेत है कि पार्टी ने अमौर में स्थानीय चेहरे पर भरोसा बरकरार रखा है। 2020 के चुनाव में सबा जफर दूसरे स्थान पर रहे थे, जिससे उनकी मजबूत जमीनी पकड़ साफ झलकती है।
अब पार्टी का फोकस AIMIM उम्मीदवार अख्तरूल ईमान के खिलाफ रणनीति को मजबूत करने पर रहेगा।
इस घोषणा के साथ ही अमौर सीट पर टिकट को लेकर चल रही अटकलें खत्म हो गई हैं, और सबा जफर अब आधिकारिक रूप से मैदान में हैं।







