बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जदयू (JDU) में टिकट बंटवारे को लेकर बड़ा भूचाल आ गया है। पार्टी के प्रदेश सचिव बद्री भगत ने टिकट न मिलने से नाराज होकर 3,875 समर्थकों के साथ इस्तीफा दे दिया। उनके इस कदम से जदयू में हड़कंप मच गया है। भगत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं पर अंदरूनी साजिश और मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।
टिकट नहीं मिलने पर फूटा गुस्सा:
जानकारी के मुताबिक, बद्री भगत को पहले करगहर विधानसभा सीट से टिकट देने का आश्वासन मिला था। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम काट दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने अपने हजारों समर्थकों के साथ जदयू को अलविदा कह दिया। भगत ने कहा कि “हमने सालों तक पार्टी के लिए गांव-गांव जाकर काम किया, लेकिन टिकट बंटवारे में मेहनती कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया।”
3,875 कार्यकर्ताओं ने दिया सामूहिक इस्तीफा:
बद्री भगत ने बताया कि उनके समर्थन में 3,875 कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसे “जनता के साथ अन्याय” बताया और कहा कि पार्टी अब जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज दबा रही है।
पार्टी के अंदर बढ़ी गुटबाजी:
प्रदेश सचिव के इस्तीफे के बाद जदयू में आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है। भगत ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल कर अंदरूनी साजिश रच रहे हैं। उनका कहना है कि “अब मेहनती कार्यकर्ताओं की जगह सिर्फ चापलूसों को तवज्जो दी जा रही है।”
पहले भी कई नेताओं ने छोड़ी थी पार्टी:
बताया जा रहा है कि जिले के कई वरिष्ठ नेता पहले ही टिकट विवाद के चलते पार्टी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं, जिनमें पूर्व मंत्री जयकुमार सिंह, पूर्व विधायक अशोक सिंह कुशवाहा और जिलाध्यक्ष अजय सिंह कुशवाहा के नाम शामिल हैं।
चुनाव से पहले जदयू को झटका:
विशेषज्ञों का कहना है कि टिकट वितरण को लेकर उठी इस बगावत से जदयू को चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, एनडीए के शीर्ष नेताओं की चुनावी सभाओं के बाद कुछ नाराज चेहरों की वापसी की संभावना भी जताई जा रही है। अब देखना होगा कि इस बार नीतीश कुमार की पार्टी राजनीतिक संकट से कैसे उबरती है।







