छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अहम स्थान रखने वाले बनवारी लाल अग्रवाल का 78 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। बुधवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। अग्रवाल प्रदेश विधानसभा के पहले उपाध्यक्ष रहे और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उनकी सादगी और जनसेवा के लिए पहचान थी। प्रदेश में उन्हें “बनवारी भैया” के नाम से जाना जाता था।
उनके निधन की खबर से कोरबा समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है। वे एक सिद्धांतवादी और संघ की विचारधारा से गहराई से जुड़े नेता थे।
राजनीतिक जीवन में अग्रवाल ने प्रदेश के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में भी अहम भूमिका निभाई। कटघोरा विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रहे अग्रवाल ने सादा के अध्यक्ष पद पर रहते हुए क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए।
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से ही उन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना। उनके नेतृत्व में क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट पूरे हुए। वे अपनी सरलता और कार्य के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।
उनके निधन से न केवल राजनीतिक जगत को बल्कि आम जनता को भी गहरा दुख पहुंचा है। प्रदेश ने एक सच्चे जनसेवक को खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।







